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मरसिया

Rajkamal ChoudharyRajkamal Choudhary
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तुम्हारी बेचैन मुस्कुराहटों के बैलून
नीले जंगल में डूब गये।
किसी छतपर नहीं उतरे,
कोई नन्ही-सी लड़की
उनके धागे पकड़ नहीं पायी।
केवल, तुम्हारी पुकार माँस का एक
ताज़ा टुकड़ा बनकर सातवीं मंज़िल की
खिड़की से बीच चौराहे पर कूद गयी।
भीड़ ने कहा – शहर में करफ़्यू है।

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