टूटें सकल बन्ध's image
1 min read

टूटें सकल बन्ध

NiaralaNiarala
0 Bookmarks 44 Reads0 Likes

टूटें सकल बन्ध
कलि के, दिशा-ज्ञान-गत हो बहे गन्ध।

रुद्ध जो धार रे
शिखर - निर्झर झरे
मधुर कलरव भरे
शून्य शत-शत रन्ध्र।

रश्मि ऋजु खींच दे
चित्र शत रंग के,
वर्ण - जीवन फले,
जागे तिमिर अन्ध।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts