मेरी नवा-ए-शौक़'s image
1 min read

मेरी नवा-ए-शौक़

Muhammad IqbalMuhammad Iqbal
0 Bookmarks 23 Reads0 Likes

मेरी नवा-ए-शौक़ से शोर हरीम-ए-ज़ात में

ग़ुल्ग़ुला-हा-ए-अल-अमाँ बुत-कदा-ए-सिफ़ात में

हूर ओ फ़रिश्ता हैं असीर मेरे तख़य्युलात में

मेरी निगाह से ख़लल तेरी तजल्लियात में

गरचे है मेरी जुस्तुजू दैर ओ हरम की नक़्शा-बंद

मेरी फ़ुग़ाँ से रुस्तख़ेज़ काबा ओ सोमनात में

गाह मिरी निगाह-ए-तेज़ चीर गई दिल-ए-वजूद

गाह उलझ के रह गई मेरे तवहहुमात में

तू ने ये क्या ग़ज़ब किया मुझ को भी फ़ाश कर दिया

मैं ही तो एक राज़ था सीना-ए-काएनात में

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts