गर कीजिए इंसाफ़ तो की ज़ोर वफ़ा मैं's image
1 min read

गर कीजिए इंसाफ़ तो की ज़ोर वफ़ा मैं

Mirza Mohammad rafi 'SaudaMirza Mohammad rafi 'Sauda
0 Bookmarks 39 Reads0 Likes

गर कीजिए इंसाफ़ तो की ज़ोर वफ़ा मैं

ख़त आते ही सब चल गए अब आप हैं या मैं

तुम जिन की सना करते हो क्या बात है उन की

लेकिन टुक इधर देखियो ऐ यार भला मैं

रखता है कुछ ऐसी वो बरहमन बचा रफ़्तार

बुत हो गया धज देख के जिस की ब-ख़ुदा मैं

यारो न बंधी उस से कभू शक्ल-ए-मुलाक़ात

मिलने को तो उस शोख़ के तरसा ही किया मैं

जब मैं गया उस के तो उसे घर में न पाया

आया वो अगर मेरे तो दर ख़ुद न रहा मैं

कैफ़िय्यत-ए-चश्म उस की मुझे याद है 'सौदा'

साग़र को मिरे हाथ से लीजो कि चला मैं

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts