मेरे महबूब's image
1 min read

मेरे महबूब

Meena KumariMeena Kumari
0 Bookmarks 100 Reads0 Likes

मेरे महबूब
जब दोपहर को
समुन्दर की लहरें
मेरे दिल की धड़कनों से हमआहंग होकर उठती हैं तो
आफ़ताब की हयात आफ़री शुआओं से मुझे
तेरी जुदाई को बर्दाश्त करनें की क़ुव्वत1 मिलती है

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts