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नई दिशा

Leeladhar JagudiLeeladhar Jagudi
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बेटी जब पहली बार रजस्वला हुई
दादी और माँ के साथ
दीदी और भुली की भी याद आई मुझे

पिछली बार जब बुआ जी आईं थीं
साबी को यही समझाकर गईं
कि बेबी अब सातवें दर्ज़े में है
कभी भी अचानक कुछ हो सकता है

बेबी को पितर आशीषों से नहला गए
बेटी से ही खुलती है रिश्तों की नई दिशा ।

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