मधुकरी's image
1 min read

मधुकरी

Kuber Nath RaiKuber Nath Rai
0 Bookmarks 106 Reads0 Likes

मधुकरी
मौत की उन रस्सियों से
जीवन के एक सिर्फ सुखद क्षण की भीख माँगी थी।
हार के द्वार से साहस बटोर कर
सिर्फ एक पल की जीत माँगी थी।
छिन्नमस्ता अमामयी
कुहेलिका के नील आँचल से
एक किरण की फाँक माँगी थी।
माना कि ये सब चुप रहे
बेशील, आँखे बन्दकर, मुँह फेर
पर तुम भी तो आँख फेरने लगे
जब मैंने भीगे मन से
केवल पगधूलि माँगी थी।

[ कलकत्ता : मेकलौड हाउस, 1958 ]

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts