चकित चकत्ता चौंकि चौंकि उठै बार बार's image
1 min read

चकित चकत्ता चौंकि चौंकि उठै बार बार

Kavi BhushanKavi Bhushan
0 Bookmarks 146 Reads0 Likes

चकित चकत्ता चौंकि चौंकि उठै बार बार,
दिल्ली दहसति चितै चाहि करषति है.
बिलखि बदन बिलखत बिजैपुर पति,
फिरत फिरंगिन की नारी फरकति है.
थर थर काँपत क़ुतुब साहि गोलकुंडा,
हहरि हवस भूप भीर भरकति है.
राजा सिवराज के नगारन की धाक सुनि,
केते बादसाहन की छाती धरकति है.

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts