कहीं तो गर्द उड़े या कहीं ग़ुबार दिखे's image
1 min read

कहीं तो गर्द उड़े या कहीं ग़ुबार दिखे

GulzarGulzar
0 Bookmarks 58 Reads0 Likes

कहीं तो गर्द उड़े या कहीं ग़ुबार दिखे

कहीं से आता हुआ कोई शहसवार दिखे

ख़फ़ा थी शाख़ से शायद कि जब हवा गुज़री

ज़मीं पे गिरते हुए फूल बे-शुमार दिखे

रवाँ हैं फिर भी रुके हैं वहीं पे सदियों से

बड़े उदास लगे जब भी आबशार दिखे

कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़

किसी की आँख में हम को भी इंतिज़ार दिखे

कोई तिलिस्मी सिफ़त थी जो इस हुजूम में वो

हुए जो आँख से ओझल तो बार बार दिखे

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts