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अभिव्यक्ति ने तो आकाश को छुआ है

Gulab KhandelwalGulab Khandelwal
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अभिव्यक्ति ने तो आकाश को छुआ है
किन्तु जीवन धरती से चिपटा हुआ है;
कितना अंतर है मेरे दोनों रूपों में,
एक राजहंस तो दूसरा कछुआ है.

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