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कुछ खुदगर्ज के लिए

YUGANSHU RAVIYUGANSHU RAVI March 31, 2022
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मैंने दुनिया से अभी तक यही सीखा है ।।
कि जब तक हैं जिंदा  हम!! 
एक तलब  लिए बैठे हैं ,
अपने लिए जिये बैठे हैं !
यूं तो मुर्दों और हम मे फर्क सिर्फ इतना है कि!!
हम आँखे खुली और वो बन्द किये बैठे है !

      ------युगांशु रवि----------


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