नैसर्गिक सौंदर्य's image
Poetry2 min read

नैसर्गिक सौंदर्य

Yati Vandana TripathiYati Vandana Tripathi February 7, 2022
Share2 Bookmarks 251 Reads9 Likes

तुम्हारा विशिष्ट शौर्य,

तथा नैसर्गिक सौंदर्य,

इसकी कथा कैसे हो व्यक्त?

अभी माहौल हैं ज़रा सख़्त,

निंदा करने में कुछ लोग माहिर,

गोरी त्वचा के पीछे का पागलपन जगजाहिर!

तल्ख़ हैं थोड़ा समाज का रवैया,

मिलेगी शोहरत अगर मनोरंजन मुहैया,

किंतु सौंदर्य नहीं शरीर तक सीमित,

मानसिकता इसे स्वीकारे तो बहुत गनीमत!

तुम्हारी जुल्फें ही नहीं हैं तुम्हारी पहचान,

नक्काशी जैसे तराशे नैन नक्श न बढ़ाते तुम्हारा मान,

तुम्हारे भीतर हैं जागृति और जीवन!

उम्र हो फिर चाहे सोलह या ढल गया हो यौवन,

हंसने पर भौंहों और आंखों के नज़दीक वो उभरी लकीरें,

आनंदित करें जीवंत ऊर्जा नाकी केवल आकर्षक तस्वीरें!

अनुशासित जीवनशैली से विलुप्त होती सारी तकलीफें,

कटु वचनों को भुलाती मानकर तुम उन्हें मामूली लतीफें,

सुनो ! तुम्हारा खुश रहना निखारे तुम्हारा आज,

तुम्हारा एकाग्र होना संतुलित करता तुम्हारा कामकाज,

तुम्हारे लफ्ज़ देते तुम्हारे मस्तिष्क का सुचारू परिचय,

तुम्हारा हौसला करता नैसर्गिक सौंदर्य का विनिश्चय।


- यति


No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts