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अप्रत्यक्ष विजेता

Yati Vandana TripathiYati Vandana Tripathi August 12, 2022
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मुस्कान तब्दील होकर बनी हंसी,

उत्सुकता दिल में हुई फिर बसी,

मन में पनपते सपने कुछ सशक्त,

गुज़रता देख रहे थे समक्ष वक्त,


ये लोग भला हैं कौन,

कब से थे आखिर ये मौन?


ये कोरोना की महामारी से निकले,

दुख देखो इनकी व्यथा में झलके!

ये खो चुके थे संपूर्ण आस,

सामर्थ्य ही था केवल इनके पास,


ये हैं अप्रत्यक्ष विजेता,

जिन्हें शाबाशी सब्र हैं देता!


घर में इनके था कोई पीड़ित,

मौत से भी हुआ कोई क्रीडित,

दो साल बाद मिला स्थाई रोज़गार,

चुका पा रहे देखो ये पिछला उधार!


ये वो हैं जो हालात से नहीं हारे,

फिर खिलीं इनके आंगन खुशियों की बहारे,


ये सभी अपनी जड़ों से थे सदैव जुड़े,

आत्मसमर्पण से भी ना ज़रा कभी मुड़े,

आज बतलाते ये पुरानी जुगाड़ वाले किस्से,

नहीं चाहते कभी कष्ट आए फिर किसी के हिस्से!




- यति



You've won this battle!❤️


:D



May you stay healthy,wealthy & wise.

:)

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