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✍️नश्तर✍️
खूबसूरत से दो पत्थर खरीद लाया हूं
भरे बाज़ार मैं ईश्वर खरीद लाया हूं
मैं हूं रईस मेरा शौक है खरिदारी
मान-ईमान के बिस्तर खरीद लाया हूं
प्यार जज़्बात सब बिकते हैं अब बाजारों में
मैं भी शामिल हूं महोब्बत के खरीदारों में
तरक्की खूब सस्ती आज तो निलाम हुई
ज़मीर बेचकर किस्मत खरीद लाया हूं
मैंने बचपन को आज फिर कहीं बिकते देखा
उन रईसों की ठोकरों में बिलखते देखा
मरहबा देखकर आती हुई बर्बादी का
मैं शराफत को सस्ते दाम खरीद लाया हूं
बेचकर अपनी सब जागीर "विनय"
मैं खुद अपने लिए नश्तर खरीद लाया हूं.

- विनय_आजाद
#writervinayazad

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