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पेड़ पानी से ख़फ़ा लगता है (ग़ज़ल)

vishwajeet_gudadhevishwajeet_gudadhe January 10, 2023
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पेड़ पानी से ख़फ़ा लगता है

बाढ़ आई थी, पता लगता है


ख़ाली जगहें यूँ न रखिए साहिब

इश्तिहारों को बुरा लगता है


हाशिए जब से हुए हैं रौशन

रंग-ए-तहज़ीब उड़ा लगता है


जब कि हाथों की थमी है सिहरन

क्यों लरज़ता सा छुरा लगता है?


क्या करे कोई भला इस दिल का?

जो न लग कर भी लगा लगता है


बेबसी है या कि ये सद्मा है?

जो गुज़रता है ख़ुदा लगता है


- विश्वजीत गुडधे


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