कुछ-कुछ's image
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मैंने कोरे कागज पर कुछ लिखा

ओर उसने पढ लिया।

जो लिखा था मैंने 

वो उसने मुँह - जुबानी रट लिया।


मैंने जो कुछ लिखा था उस पर

वो कुछ सिर्फ़ वो जानती थी।

उस कुछ में था कितना कुछ

वो तो उसे बहुत कुछ मानती थी।

जो कुछ मुझे कहना था उसकों, 

उसने वो कुछ उस कुछ-कुछ से समझ लिया।


वो जब भी आती मेरे घर

मेरी माँ से कुछ कह जाती थी।

कुछ-कुछ कह देती थी मुझसे

कुछ-कुछ कहने में शरमाती थी।

कुछ कदम आगें बड़ी वो, 

कुछ कदम आगें में भी बड़ लिया।

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