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ग्रीष्म की चांदनी भी बयां कीजिए।

Vishal ShandilyaVishal Shandilya May 21, 2022
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उठने दीजिए गर्म हवा अब दूसरे पहर से 

इश्क में थोड़ा शाम का भी मजा लीजिए।

बसंत तक न रोकिए मोहब्बत के मिजाज

कभी ग्रीष्म की चांदनी भी बयां कीजिए।


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