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दम तोडने लगे जब उम्मीद भरी ये सांसें।

Vishal ShandilyaVishal Shandilya September 13, 2021
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दम तोडने लगे जब उम्मीद भरी ये सांसें।

लड़कर हारने लगे ख्वाहिशें मुश्किलों से।

चलते रुकते सफ़र में धूप भी ढलने लगे।

नज़र ये जमने लगे कदम भी थमने लगे।

सहारा बन कर तब तुम मुझे थाम लेना।

आस जगाना मुझमें हिम्मत भरते जाना।


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