सितम देखते हैं full ghazal by Vinit Singh Shayar's image
Romantic PoetryPoetry1 min read

सितम देखते हैं full ghazal by Vinit Singh Shayar

Vinit SinghVinit Singh April 15, 2022
Share0 Bookmarks 51 Reads1 Likes

आइने में हम अपना ग़म देखते हैं

उन्हें आज कल बहुत कम देखते हैं


हाथ रखते हैं गैरों के कंधे पर जब वो

हाथ को सर पे रख के सितम देखते हैं


हर महीने मनाते हैं वो बर्थ डे और

अपनी शादी में भी हम मातम देखते हैं


मजबूरी को दे कर मोहब्बत का नाम

अपनी दुल्हन में अपना सनम देखते हैं


हिजरत ने मारा किस क़दर ये ना पूछो

को को कोला में भी अब तो रम देखते हैं


~विनीत सिंह

Vinit Singh Shayar

Shayari Ghazal


No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts