Wo mohabbat (वो मोहब्बत)'s image
Love Poetry1 min read

Wo mohabbat (वो मोहब्बत)

vijaybhalvijaybhal June 16, 2020
Share0 Bookmarks 48 Reads1 Likes

महफ़िल कहती हैं भुला दो उनको, फिर भी दिल से रहा नही जाता।

तस्वीर सामने आती जब उनकी, वो दर्द भी दिल से सहा नही जाता।।

किस नादानी की सजा मिली है, इतना बस कोई बतला दे।

हर गलती पर सर झुका दे हम तो, कोई उनकी जबां से कहला दे।।

अनजानी मोहब्बत की इस खोफ सजा को दिल से स्वीकार करता हूं।

फिर से ना हो जाये ये गुस्ताखी, सिर्फ इसी बात से डरता हूँ।।

-विजय

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts