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किसी रोज़ तुम भी दस्तक दे जाना....

vijay ranavijay rana September 4, 2021
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यूं तो हर रोज दस्तक दे जाती हैं यादें तेरी

तुम भी किसी रोज यूं ही दस्तक दे जाना


यूं तो इंतेहा नहीं तुम्हारी बेरुखी की कोई

हो सके तो रुख मेरे घर का करते जाना


महफिलों से जब भी मिले फुर्सत तुम्हें

मेरी दर्द ए महफिल में शामिल हो जाना


देख जाना सूरत ए हाल मेरा भी कभी

मेरी तन्हाइयों से भी तुम मिलते जाना


तुम्हारी यादों के टिमटिमाते तारों से

ज़िंदगी जो रोशन है उसे देखते जाना


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