बिंदास बचपन की बंदिशें's image
1 min read

बिंदास बचपन की बंदिशें

vijay ranavijay rana January 4, 2022
Share0 Bookmarks 105 Reads1 Likes
बेधड़क बिंदास बचपन की वो  सारी बंदिशें
और उनको तोड़ने की बदमाशियां सब याद हैं

पत्थरों से हमारा खेलना फुटबाल अक्सर
फिर हमारा फुटबाल बनना भी बखूबी याद है

घुटनों और कुहनियों की वो अनगिनत चोटें 
हर चोट के वो दर्द मीठे और हर कहानी याद है

छुप छुपा कर गली में ,कंचे खेलकर आना 
और जीते हुए कंचों में हीरों की चमक याद है

बस चुटकी में यूं ही फुर्र हो जाता है बचपन
फुर्र हो जाती वो चिड़िया ,वो गुलेलें याद हैं

राजा रानी और भुतहा महल के वो किस्से
नानी की गोद में सुनी सारी कहानी याद हैं

बचपन जो गुजर जाते थे ऐसी खुशियों के बगैर
तब उनको देखकर हमारा चौंक जाना याद है

अधूरे किसी बचपन को कुछ मीठी यादें बांटकर
जी लें सारे वो लम्हें जो आज तक हमें याद हैं

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts