गाजर का हलवा's image
Share0 Bookmarks 68 Reads1 Likes


एक रोज मेरे मन ने चहकते हुए,

गाजर का हलवा खाने की इच्छा ज़ाहिर की,

मेरे बहुत ज़ोर देने के बाद भी,

उन्होंने नहीं बनाया गाजर का हलवा।

मैं उदास हुआ, फ़िर अपने मन को समझा लिया।

उसके अगले शाम बेहद प्रेम से बने,

मेरे सबसे पसंदीदा गाजर के हलवे में,

नहीं लगा मुझे वह स्वाद।

मुझे लगता है, कोई भी स्वाद,

बस जीभ भर सीमित नहीं होता है,

स्वाद होता है, स्वतंत्र इच्छाओं के मुकम्मल होने में।


-- विक्की आनंद (कैप्टेन)

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts