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Ayushmann KhurranaPoetry1 min read

तुम्हारे बिना

VicharVichar December 1, 2021
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हुनर जीने का आ जाये
तुम्हारे  बिना?
ये मुमकिन नहीं।
ये जीवन फिर से जगमगाये 
तुम्हारे बिना?
ये मुमकिन नहीं।
रेत की तरह उड़ रहे हैं
इधर से उधर
नदी की तरह रास्ता बना लें
तुम्हारे बिना?
ये मुमकिन नहीं।

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