इत्मीनान के लफ्ज़'s image
Poetry1 min read

इत्मीनान के लफ्ज़

vaishnavpriyanka1984vaishnavpriyanka1984 December 15, 2022
Share0 Bookmarks 10 Reads0 Likes
कुछ लफ्ज़ बड़े ही इत्मीनान से पिरोए है मैंने
इतने की हर पन्ने का नूर निकल आया है
यह लफ्ज़ ठीक मेरे ईश्वरीय प्रेम की तरह है
जो अनुभव से नहीं ,कल्पनाओं से बंधे है
जहां समर्पित हूं, बिना किसी प्रत्यक्ष प्रमाण के
अनुभव के बंधनों से मुक्त ,शायद कल्पना ही प्रेम का स्थाई स्वरूप है।



























No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts