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Kumar VishwasPoetry1 min read

सुखाना चाह रहे लोकतंत्र का मूल

Umesh ShuklaUmesh Shukla October 8, 2021
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कौन हैं वो जो सुखाना चाह

रहे अब लोकतंत्र का मूल


समाजवाद और मानवता के

सब मानदंड गए अब भूल


संविधान की शपथ लेकर बने

कभी वे जनता के प्रतिनिधि


मगर नीतियों रीतियों से पोस

रहे धन्नासेठों को बहु विधि


सरकारी संस्थानों के उत्थान

की उन्हें तनिक नहीं परवाह


निजीकरण की रफ्तार को तीव्र

करने की बस उनमें उत्कट चाह


भूल गए हैं वो सभी सरकारों के

संवैधानिक कार्य और उद्देश्य


जनता जनार्दन को दिया करते हैं

जब तब वे काल्पनिक उपदेश


कथनी और करनी में उनकी है

जमीन आसमान जैसा ही अंतर


फिर मंसूबा पाले हुए कि राजकाज

पर अधिकार बना रहे जिंदगीभर


देश के सियासी हालातों का हम

सबको रखना होगा बहुत ध्यान


अन्यथा संकट के दलदल में फंस

जाएगा हमारा प्यारा हिंदुस्तान


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