आजादी का अमृत's image
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आजादी का अमृत छक गए,

नेता और हुक्काम

पर बाधाओं, पीड़ाओं से

सदा जन मन रहा धड़ाम

मनमानी और जुल्म के

वाकए होते गए आम

आजादी का,,,

नेताओं की कई पीढ़ियां

सत्ता का सुख भोग गईं

शहर शहर में हुक्कामों की

खड़ी कोठियां चमक रहीं

संविधान की सभी शक्तियां

इन पे डाल न सकीं लगाम

आजादी का,,,

सीबीआई, ईडी, आईटी के

तंत्र पर होते खड़े सवाल

जांच प्रक्रियाएं उनकी सदा

रहीं बस शब्दों का ही जाल

अपराधी और अपराध बढ़े

सतत मचता रहा कोहराम

आजादी का,,,

बदलावों की राह देख रहे

संविधान के कई प्रावधान

चिंतन, मनन से ही मिलेगा

जन मन के दुखों का निदान

पर नेताओं को नहीं सालता

योजनाओं पर लगा विराम

आजादी का,,,

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