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Romantic PoetryPoetry1 min read

मैं दिन का उजाला हूँ

Umakant YadavUmakant Yadav October 15, 2021
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मैं दिन का उजाला हूँ

तु रात की रानी है

मैं तेरा फ़साना हूँ

तू मेरी कहानी है


तेरे बिना मेरी बस्ती

कुछ करके नहीं बसती

मैं फ़ुल कमल का हूँ

तू ताल का पानी है


मैं तेरा फ़साना हूँ

तू मेरी कहानी है


तुझे ढूँढ हीं लेते है

ये मेरे बहेकते क़दम

मैं अटल शराबी हूँ

तु मय अफ़ग़ानी है


मैं तेरा फ़साना हूँ

तू मेरी कहानी है


मैं जाऊँ कहीं पर भी

है आस पास ही तू

मैं ईतर की शीशी हूँ

तू ख़ुश्बू सुहानी है


मैं तेरा फ़साना हूँ

तू मेरी कहानी है


कभी कभी लेकिन

तू तंग यूँ करती है

मैं ग़रीब की झोपड़ी हूँ

तू टपकता पानी है


मैं तेरा फ़साना हूँ

तू मेरी कहानी है


तेरे मेरे मिलने से

दो फूल खिले हैं जो

एक थोड़ा सयाना है

एक ज़्यादा सयानी है


मैं तेरा फ़साना हूँ

तू मेरी कहानी है


ये साथ रहे अपना 

जैसे हंसों का हो

जितना तेरा फ़साना है

उतनी मेरी कहानी है

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