शेर शायरी's image
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देखता हूँ, आज हर जगह, हर कोई,  

खुदा का नूर पाने को यहाँ वेताब है ।

क्या मिल सकेगा ,नूरे खुदा का ?

जहॉ सम भाव की जगह ,

नफरत वेहिसाब और मजहब का दीवाल है ।।

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