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लौटना ज़रूरी है

त्राणत्राण December 3, 2021
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लौटना ज़रूरी है

जी हाँ 

लौट आइये

क्यूँकि लौटना ज़रूरी है


जैसे बीज लौट आते हैं वापस बगीचे में

और पत्तियाँ पुनः लौटती है शाख़ों पे पतझड़ के बाद

पक्षियाँ लौटती है प्रवास के बाद 


लौट के आना हीं पड़ता है मौजों को शांत समुंदर में

जैसे उफनती नदियाँ लौटती हैं अपने दायरे में

और खेतों में लौट आते हैं किसान आख़िर 


सत्ता लौट आती है वापस गाँवों में निरस्त होने पर 

उन्मादी भी लौटते हैं अपने सभागारों में 

और ग़रीबी वापस लौटती है भूख पे 


शहरों की भीड़ लौट आती है गाँव के मेले में

और त्योहार लौट आते हैं वापस परिवारों में

लौट आता है आँखों का पानी में अपनों से मिलने पे 



सभ्यता लौटती हैं वैचारिकता पे

और विवेक लौट आता है विज्ञान पे

चेतना अंतत: लौट हीं आती है सत्य पे



देखो कैसे सब लौटते हैं अपनी अपनी मौलिकता पे 

तुम भी लौट आओ वापस

इससे पहले कि रास्ते वापसी के 

क्षितिज के पार हो जाएँ।

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