प्रतिभा's image
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दृष्टान्त पुरूषों का लो, या महिलाओ का, 
सफर दोनो ने तय किया, जमीन से ऊंचाई का, 
सीखने के लिए दोनो का उदाहरण काफ़ी हैं, 
खुद नया उदाहरण बनना,  बस तुम्हारा बाकी है, 
पुरुष हों या महिला, सफल व्यक्तियो के नाम कई,  
झांक कर खुद में देखो, दूसरा तुम सा भी नहीं, 
दूसरे के जैसा नहीं, तुम खुद जैसा बनो ना, 
कोई तुम सा बनना चाहे, कुछ ऐसा करो ना, 
रच दो खुद को, एक रचनाकार बनकर,  
रहो तुम वही, बस प्रतिभा उभरे निखरकर,  
निखरने का काम,  तुमने खुद में करना हैं, 
कौशल को तुमने बारीकी से बुनना हैं, 
कौशल तुम्हारे जब सारे बुन जायेंगे,  
कार्य योग्यता में बदलाव स्वत ही नज़र आयेंगे, 
यही से होगी तुम्हारे निखरने की शुरूआत,  
तुम्हारी होगी, खुद की प्रतिभा से मुलाक़ात,  
ये प्रतिभा ही तुम्हारी पहचान बन जाए,  
तराशे हुए पत्थर से हीरा निकल आए, 
आसमान को पाकर छोड़ना मत ज़मीन को, 
जिंदगी में भागते भागते भूलना मत हंसी को, 
कामयाबी बङी है, पर खुशी से बढ़कर नहीं, 
जो जीते है कामयाबी के लिए,  वो भी जीना छोङते नहीं 

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