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कविता का रंग

Surbhi ThakurSurbhi Thakur June 12, 2022
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कवि होने की शर्त हैं,   हर कविता का सम्मान, 
स्वरचित हों या किसी अन्य की, पर हों उस पर मान, 
विचार, भावनाएं, शब्द  कितने पहलू कविता के, 
जैसे पृष्ठ पर अवतरित हृदय,  हर रचयिता के, 
श्रोता के मन को  कवितायें यूं ही नहीं भाती, 
कवि का  दिल हों  जब समर्पित, कलम खुद ब ख़ुद चल जाती, 
कितने रंग की कविता, कितने रंग में लिख देता,
इस अंदाज़ से शब्दों को ,  कोई और नहीं कहता, 
कविताओं की तुलना करना फिजूल हैं, 
हर रंग पर, हर रंग का  वार जैसे त्रिशूल हैं, 
कवियों के अंदाज़ में  हैं,  कितनी  भिन्नता,
पर किसी अंदाज़ को लेकर  नहीं हीनता,
हीनता हों भी क्यूं, लेखन के प्रति प्यार जो अपार, 
कविताओं में निहित हैं  हर रंग की धार, 
कवितायें मिश्रण हैं,  जिसमें हर रंग का घोल, 
कविताओं में जान हैं, कवि के भारी बोल, 
यहीं तो पहचान हैं , हर कवि की इस जग में, 
शब्द के जादू बिखेरता,  लेखन के हर पग में, 
तभी तो कवि और कविता दोनों का सम्मान हैं, 
कवियों की मेहनत से ही, कविता जगत आलिशान हैं

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