कवी की जोरू's image
Poetry1 min read

कवी की जोरू

NidhiNidhi January 6, 2022
Share0 Bookmarks 285 Reads0 Likes

कवी की जोरू


बहुत आसान रहा होगा हर उस कवी के लिए कुछ लिख पाना 

जिसकी जोरू उसके लिए उपले जला, 

आटा गूंद, गरम रोटी पकाती होगी I  

भरे पेट में रामलखन के शरीर के कोड़े की पीड़ा महसूस होती होगी

भरे पेट में शनीला के खींचे हुए दुपट्टे की लाज भी आती होगी I 

कवी के भरे पेट से दुनिया के दर्द का मरहम बनता ही होगा 

की जोरू चूल्हे की आग के धुंए के आंसू पोंछती रोटी बनाती होगी I

कवी की भूख सिर्फ भूख है, रोटी की,

और रोटी की ज़िम्मेवार,

हर बार, 

वो जोरू I


No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts