सामंजस्य's image
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चेहरे की मुस्कान छुपाती, दर्द सभी उर अन्तर के,

पर पलकों के पीछे की, हर हलचल सत्य बोलती है।

ये होंठ भले खामोश रहें, या चेहरा रहे मुखौटे में,

जब दर्द उभरता है दिल में,तो आंखें राज खोलतीं हैं।।

...

तन के ढांचे में कैद,हृदय की धड़कन सममित,सौम्य रहे,

तो मन की सोच सदा निर्मल, निश्छल, हितकारी होती है।

छल,कपट,द्वेष के भावो का, उद्भव होता है सिर्फ तभी,

जब मन होता उद्विग्न, कलुषता मन पर भारी होती है।।

...

जीवन के साथ प्रकृति का सामंजस्य,समाहित तन मन में,

बदले मौसम के साथ साथ, रिश्ते, व्यवहार बदलते हैं।

हम कितने भी प्रतिबंध लगा लें,अपनी सोच, विचारों पर,

पर समझदार कहलाते वो, जो साथ हवा के चलते हैं।।



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