हर नए साल...'s image
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हर नये साल, नया जोश उबलते देखा।

साल-दर-साल, कलेंडर को बदलते देखा।

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जो गया बीत, उसे तो न कभी याद किया।

आने वाले के लिए, सबको मचलते देखा।।

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दर्द, दुःख, कष्ट,आंसुओं को किनारे कर के।

एक उम्मीद को हर दिल में उछलते देखा।।

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एक आतंक के आगोश में समाए अगणित।

सभी को संक्रमण से बचते, संभलते देखा।।

...

सभी परिवारों ने झेला, है दंश-ए-कोरोना।

हर गली, बस्ती में, बच्चों को बिलखते देखा।।

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दो लहर बीत गईं, तीसरी लहर बाकी।

फिर उसी हाल में, इस साल को ढलते देखा।।

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मिली जो "वैक्सीन" तो थमा अदृश्य कहर।

मगर उसे भी, कई रूप बदलते देखा।।

...

न जाने कब तलक झेलेंगे दर्द , और कितना?

किसी को इस तरह जीवन को न छलते देखा।।

...

अब नये साल से उम्मीद, कामना है यही।

वो न देखें कभी, जो दो साल से चलते देखा।।


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