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कुछ ऐसा कहो के छू जाए
दिल को ही नहीं रूह को भी सुकून आए

लफ्जो को मोतियों सा चुनना
प्यार के धागे में पिरोना
शहद में डुबो के होठों से ऐसे कहना
के मय सा सुरूर आए

फूलों से खुशबू लेकर
कलियों से नज़ाकत,
खिलती धूप से गर्माहट ले कर
ऐसे कहो के बंजर ज़मीं फ़िरदौस हो जाए

आंखों से जो कह रहे हो लब से बयां करदो
इस ख़ामोशी को तोड़ कर हम पे एहसान करदो
मांग लो चाहे जान भी बदले में
ऐसे तो हम नहीं के एहसान-फरमोश हो जाएं ...


_स्वाति शर्मा

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