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बेमतलब की यारी

Sumeet ParikshitSumeet Parikshit May 2, 2022
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खर्च बढ़ा जब मेरे रिश्तों में,

दिलदारी हम ने छोड़ दिया,

आया मज़ा जब तनहा जीने में, 

यूँ मिलना जुलना छोड़ दिया,

रह गए कुछ दोस्त खाते में,

ये क़र्ज़ जिन्होंने माफ़ किया 

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