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"चिड़िया "

Suman AryaSuman Arya January 12, 2022
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वो कहते हैं चिड़िया हूँ मैं !! 
चिड़िया ,जिसका तय है दायरा 
बेशक् उड़ाने भरो तुम ये हैं कहते , 
और पंखो पर मेरे लगाम है लगाते!! 

चिड़िया 
जिसके पन्ने भरे हैं हिदायतो से , 
पन्ने कुछ मुड़े कुछ फटे से!! 
उड़ान जिसकी नपी हुई सी, 
आवाज़ हैं उसकी दबी हुई सी!! 

चिड़िया जिसके अनगिनत हैं ख्वाब , 
हैं पुरा आसमां नापने को बेताब ! 
हैं थोड़ी चुलबूली सी खुद मे मग्न वो 
कुछ अधूरी कुछ है खुली किताब !! 

जो ना जाने पिंजरे की भाषा , 
जो है कुछ नादान सी , 
चिड़िया जो खामोशी मे भी सुनती हर आवाज़ सी, 

चिड़िया जिसके मन में चलती जंग हैं , 
फिर भी अंदाजो में दिखाती वो दबंग हैं!! 

पर तोड़ेगी वो हर वो दायरा 
जो थामे उसके पंखो को, 
चिड़िया हैं फिर से उड़ने को तैयार
बस कोई रोक न ले उसे इस बार!! 

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