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तलाश मोहब्बत की।

Sudha KushwahaSudha Kushwaha February 10, 2022
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यह तो होना ही था।

एक दिन आपको अपनो की महफिल में गैर होना ही था।

एक मासूम का दिल तोड़ कर।

तुम जो इतना इतरा रहे थे।

बार-बार उसके बेवफाई के किस्से सुना रहे थे।

सच तो यही था

ना तुम बेवफा थे।

ना हम तुमसे खफा थे।

हम तो अपनी तकदीर पर रुसवा थे ।

जिस कायनात ने हमें दि ए जिंदगी।

तोहफे के रूप में दिया था।

दर्द ए इश्क।

हम उससे क्या कहेंगे।

खुशियों को दर बदर कब तक तलाशते रहेंगे।

हम अपनों के भीड़ में गैरों से नजर आए।

गली-गली घूमकर तलाशा।

हर गली हर नुक्कड़ पर इंतजार किया।

फिर भी हम वफा ना पाए।

हाय रे तकदीर हमारी जब से जाना खुद को हमने।

हम कभी मुस्कुरा ना पाए।

यह तो होना ही था।

एक दिन आपको लौट कर आना ही था।

हमें भी तो भरोसा था। की

हमसे ज्यादा इश्क आपको कोई कर नहीं पाएगा।

यह सच आप से पचाया नहीं जाएगा।

आपका दिल हमारा होने के बाद किसी और का ना हो पाएगा।

जब याद करोगे हमें।

तुम्हारे दिल में एक दर्द होगा।

जो तुमसे सहा ना जाएगा।

तुम्हारा दिल कभी खुलकर मुस्कुराना पाएगा।

दरबदर भटके गा।

एक बूंद इश्क के लिए ।

पर कहीं ना पाएगा

एक दिन तो मेरे पास लौट कर चला ही आएगा।

तुम देखते तो रहना।

तुम्हारा दिल।

मेरे ही दामन में मुस्कुराएगा।

तुम्हें खुद मालूम नहीं।

कितना इश्क किया है तुमने हमसे।

यही तुम्हारा दिल तुम्हें हर बार बताएगा।








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