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रातों-रात हम तेरे शहर में।

Sudha KushwahaSudha Kushwaha April 6, 2022
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रातों-रात हम तेरे शहर में।

अमीर हो गए।

दुनिया जो पीछे छोड़ कर चली गई थी।

उसी दिन तो हम खुश नसीब हो गए।

इस बात का अंदाजा तब हुआ।

जब रातों-रात हम तेरे शहर में अमीर हो गए।

तुझे इस बात की खबर ना हुई।

के हम कितने करीब हो गए।

दुनिया ने कहा कितना नसीब वाला था तू।

रातो रात अमीर हो गया।

तू इस शहर के कितने करीब हो गया।

तू कितना अमीर हो गया।

पर यकीन करो।

दिल यह जानता है।

की क्या-क्या खो दिया।

अपना गांव छोड़कर

शहर तक चले आए हम।

पहले इस बात का नहीं था मुझको गम।

रातो रात हम तेरे शहर में अमीर हो गए।

दुनिया जो कभी पीछे छोड़ कर चली गई थी।

जिस शोहरत के बलबूते खड़ी थी मैं।

वह बेकार सी लगने लगी।

आज लगता है।

अम्मा की रोटी कहीं गुम है।

पापा की गाली कहीं सुन।

गांव की पगडंडी आ याद आती है मुझे।

अम्मा बुलाती है मुझे।

मेरे दोस्तों की याद सताती है मुझे।

मेरी बहना याद आती है मुझे।

वह गांव की ठंडी हवा बुलाती है मुझे।

पर यह शहर मुझे जाने नहीं देता।

रातों-रात हम तेरे शहर में अमीर हो गए।

दुनिया जो छोड़कर कभी पीछे चली गई थी

उसी दिन तो हम खुश नसीब हो गए




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