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जब किस्मत के भरोसे जिया करते हैं।

Sudha KushwahaSudha Kushwaha July 12, 2022
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किस्मत के भरोसे जो जिया करते हैं।

गम और आशु वह उधार लिया करते हैं।

अपनों की परछाई से अलग होकर।

परायो पर भरोसा करते हैं।

किस्मत के भरोसे जीने वाले।

हमेशा गलत फैसले लिया करते हैं।

दिल और दिमाग को छोड़कर जो।

किस्मत के भरोसे रहते हैं।

वो खुद के ही वेरी रहते हैं।

बात-बात पर फैसले बदलते हैं।

उनको खुद नहीं पता क्या करना है।

इतने विचलित रहते हैं।

मुस्कुराना तो जानते नहीं।

उससे भी खफा खफा रहते हैं।

किस्मत के भरोसे जीने वाले।

अपनों से रुठे रुठे रहते हैं।

तकदीर से टूटे टूटे रहते हैं।

किस्मत के भरोसे जो जिया करते हैं।

गम और आशु उधार लिया करते हैं।

जिंदगी समझ में नहीं आती फिर भी जिया करते हैं।

मुश्किल वक्त से भागने की कोशिश करते हैं।

अरे जनाब यह किस्मत के भरोसे जीने वाले।

हर छोटी सी बात पर डरते हैं।

कहते कुछ और है।

करते कुछ और हैं।

यह किस्मत के भरोसे जीने वाले।

वफा से कोसों दूर रहते हैं।

यह मस्ताने पागल बहके बहके रहते हैं।

इनको खुद मालूम नहीं क्या करना।

यह इतना कंफ्यूज रहते हैं।

क्या हासिल करना है उस पर भी यह बहुत सोच विचार करते हैं।

उसको भी किस्मत के भरोसे छोड़ा करते हैं।

यह किस्मत के भरोसे जीने वाले जीवन में कभी कुछ हासिल ना करते हैं।



अमृत की एक बूंद ~sudha

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