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उम्र होती जा रही है इंतजार की।

कभी-कभी आ मिलो मुझसे।

मेरे दिल के दीवार के उस पार ही।

कम से कम आकर मिलो।

जिस्म को इंतजार भी।

रूह बेकरार भी।

नहीं मालूम।

इसे क्या चाहिए।

जिस्म को कुछ चाहिए नहीं।

इस रूह को पता नहीं किसका इंतजार है।

उम्र होती जा रही है इंतजार की।

हाथों में लगे वह ख्वाब की।

उम्र होती जा रही है इंतजार।

घड़ी दो घड़ी इसके अंदर।

जाने का जी चाहता अंदर।

जहां एक सुनसान है समंदर।

हजारों सवाल है पर जवाब नहीं मालूम।

आप तो सवालों के भी उम्र होते जा रहे हैं।

जिसे हम अपना कह आए थे।

नहीं मालूम।

अब वह क्या है।

उम्र होती जा रही है इंतजार की।

बेसब्रियां से घड़ी घड़ी गिन रही है जिंदगी।

जाने किस तारीख को तोड़ने की।

आम का पेड़ तो नहीं है की।

तोड़ लेंगे 1 तारीख।

उम्र होती जा रही है इंतजार की।

देखते हैं कब लौटते हैं ओ।

जिंदगी के नखरे मुकाम की।



अमृत की एक बूंद _सुधा

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