एहसान ।'s image
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इतना एहसान करो ना ए जिंदगी के हम उतारना पाए।

घर की एक एक ईट बेच कर भी हम मुस्कुरा ना पाए।

पैसों की इस दुनिया में।

हम बिना कमाए रह ना पाए।

ए जिंदगी हम मुस्कुराए तो मुस्कुराए कैसे।

वक्त कि इस मार ने अंधा कर दिया।

बोझ के तले एक दबा दिया।

इतना आसान न करो ए जिंदगी के हम उतारना पाए।

घर की एक एक ईट बेच कर भी मुस्कुरा ना पाए।

लिफाफे में कैद है मंजिले ए दास्तान।

हम वहां तक पहुंच ना पाए।

हम एक बूंद खुशी के लिए लड़ते रहे।

हम हर रोज धूप और पसीने को एक करते रहे।

इन बुरे हालातों में भी हम मुस्कुराते रहे।

शिकायत क्या करते हैं हम उस ईश्वर से।

बस अपने पुराने कर्म सोच कर् हम उतार ते रहे।





अमृत की एक बूंद_सुधा




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