आज  सुबह।p's image
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रात की चांदनी कट गई थी।

भोर से लड़कर सुबह उस दिन निकल गई थी।

चांद से लड़कर।

सूरज बिखेर रहा था।

अपने प्रकाश की खूबसूरत लालिमा।

दरवाजों से छनकर आ रही थी किरणों की वह खूबसूरत धारा।

मैं सो रही थी बिस्तर पर।

जब उठी तो इस एहसासों का किरण।

छू रहा था मेरे तन मन और आगन।

मन में एक सुंदर भवन।

भवन के आसपास खील रहा था उपवन।

रात की चांदनी कट गई थी।

भोर से लड़कर सुबह की वह रागिनी निकल गई थी।

मंद मंद रोशनी में।

चांदनी सिमट गई थी।

मेरे घर के आंगन में कमल की एक टहनी खिल गई थी ।

मयूर ने शोर लगाई थी।

घर की दीवारों तक में भी प्रकाश की एक किरण छाई थी।

मेरे महादेव की आंचल में।

एक बूंद सूरज की किरणें।

छनकर उनके माथे से टकराई थी।

गजब का शोर हुआ था।

तभी तो एक भक्तों के मन में भोर हुआ था।

घनघोर हुआ था।

क्या खूब हुआ था।



अमृत की एक बूंद_sudha

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