मोहे बिटिया न कीजो's image
Poetry2 min read

मोहे बिटिया न कीजो

Sristi MishraSristi Mishra November 16, 2022
Share0 Bookmarks 51 Reads1 Likes
हे मालिक ! मेरी सुन लीजो,

अगले जनम मोहे बिटिया ना कीजो।



पत्ता , कीड़ा बनाय के ,

भले जमीन पर फेंक दीजो,

बस मालिक ! मोहे बिटिया न कीजो।



इज्जत नाही बिटिया की,

तोरी सागर सी दुनिया मां



अरे ! आसमान में जायके बड़ी हूं

देख दुनिया की छोटी सोच 

मैं सिसकती भू में पड़ी हूं।



अरे ! तुझे बनाना है तो 

रेगिस्तान का ऊंट बनाय दीजो,

बस अगले जनम; मोहे बिटिया न कीजो।



सभी सिर्फ हमपे अपना हक जतावे,

पूछे ना कोई...

बेटी जीवन मां का करना चाहवे...?



हे मालिक ! चाहे मेरी आत्मा भटके दीजो,

बस अगले जनम इतनी सी सुन लीजो,

मोहे ! मोहे बिटिया न कीजो।



सगरी किस्मत लिख दियो तू 

न जाने किसके नाम ?

माहरे हक में कभी न आयो 

सुख ,शांति ,विश्राम।



कभी ना निकली घर से मैं  

टाफी, बिस्कुट खाने को,

रोक दिया उस वक्त कदम 

जब दौड़ी पंख लगाने को।



ईट ,पत्थर ; मोहे तू सबै बनाय दीजो!

पर हे मालिक ! मेरी इतनी सी सुन लीजो,

अगले जनम मोहे बिटिया न कीजो।



~सृष्टि मिश्रा
#sristivalistory 

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts