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ऑनलाइन रहकर भी जवाब नहीं दे पाती हो

SOURAV SHARMASOURAV SHARMA September 3, 2022
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 तुम ऑनलाइन रहकर भी जवाब नही दे पाती हो 

आज कल तुम अपना डाॅटा जाने कहां खपाती हो 

लगता है तुम्हारी जिंदगी मे कोई अजीज आ गया है

तभी तो खुद को देर रात तक व्यस्त रख पाती हो

मै इंतजार करता रहता हूं तुम्हारा दिन और रात और

तुम हो जो चैट आॅफ करके न जाने कहां छिप जाती हो

बड़ी आसानी से तुम बेरुखी इख्तियार कर लेती हो 

समझ नही आता साथ बितायें पलों को कैसे भूल जाती हो 

मै तेरे साथ साथ चलना चाहता हूं हमेशा तेरा साया बनकर 

तुम्हें तो धूप से नफरत थी न क्या अब बाहर आती जाती हो

अब मै उसके लिये इतना गैर बन गया हूं और कोई होगा नही

बस इतना कहूंगा वो वादे मत करना जो निभा नही पाती हो

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