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पीली सरसों से वो लडके!!

Shrutika SahShrutika Sah March 4, 2022
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जिम्मेदारियों के बोझ से
कुछ ऐसे दब जाते हैं लड़के,
जैसे मिट्टी के नीचे दब जाता है
कोई बीज;

वक़्त बेवक्त अपने आसुओं को रोक,
उनसे उस मिट्टी को नमी दे
दूब से उग आते हैं,
वे लड़के;

फिर प्रेम में पड़कर
रंगरेज हुए,
तो
खेतों में लहरा उठते हैं,
पीली सरसों से,
वो लड़के!!

श्रुतिका साह

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