बेआबरू बेरोजगारी's image
International Poetry DayPoetry2 min read

बेआबरू बेरोजगारी

Shripal SevdaShripal Sevda February 1, 2022
Share1 Bookmarks 447 Reads1 Likes


छात्र सड़क पर आंदोलनरत है,

रातों की नींद, चैन गायब है|

क्या सरकार सो रही है ?

क्या लोकतंत्र की यही निशानी है?

 कब  दूर  होगी  बेकारी ?

ओ! मेरी बेआबरू बेरोजगारी|


सरकार के संरक्षण में, 

कोचिंग माफिया मजे में|

सियासत के इस अंदाज से

होता तरूणों के साथ अत्याचार,

दर-दर भटकते, तलाशते रोजगार|

कब  दूर  होगी  बेकारी ?

ओ! मेरी बेआबरू बेरोजगारी|


भर्तियों में होते घोटाले,

पड़ गये मेहनतरुपी फल के लाले|

युवा अवाक् देखता नेताओं के

ये अजब- गजब खेल निराले|

कब  दूर  होगी  बेकारी ?

ओ! मेरी बेआबरू बेरोजगारी|


सरकार के कानों में जूं तक नही रेंगती,

विपक्ष इन्हें बेमतलब के मुद्दे समझती|

क्योंकि फिर उन्हें भी सरकार में आना है,

 और  वही  दोगलापन  दिखाना  है|

मिडिया को टीआरपी से मतलब, 

कौन समझे  यह पीड़ा अब?

देश का भविष्य सड़कों पर,

है यह बात बड़ी गौरतलब|

कब  दूर  होगी  बेकारी?

ओ! मेरी बेआबरू बेरोजगारी|


कब तक हिंदु- मुस्लिम शोर रहेगा?

देश कब विकास की बात करेगा?

कब बजट में शिक्षा पर जोर रहेगा?

कब तक युवा यूं ही बेरोजगार रहेगा?

ओ! मेरी  बेआबरू  बेरोजगारी|

अब तो दिखा तू कुछ समझदारी|


                      #Shrii_writes

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts