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पिता कभी मरते नहीं! ~संजय कवि 'श्रीश्री'

Shree ShreeShree Shree August 6, 2022
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पिता कभी मरते नहीं! ~संजय कवि 'श्रीश्री'


पिता सदा जीवित हैं,

पिता कभी मरते नहीं!

मेरे हर कर्म में,

दायित्व में, धर्म में;

गूंजते मेरे गीत में,

वात्सल्य में, प्रीति में;

मेरे स्वर की गूंज में,

गूंज की अनुगूंज में;

मुझमें, मेरे चित्र में,

मेरे हर चरित्र में;

पिता सदा जीवित हैं,

पिता कभी मरते नहीं!

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