शहीद सम्मान!!'s image
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शहीद की विधवा को  राष्ट्राद्यक्ष  खुद उठकर सम्मान देता है
भारत माता के लाल को स्वर्ग में कितना अभिमान तब होता है
बूढ़ी मां की आंखों में कुछ पलों में पूरा जीवन समिट आता है
माथे को चूमकर गले से लगा लेनेको मन फिर से तरसता है
गोदी में बिठाकर मीठी लोरी सुनाने का ह्रदय कर आता  है 
सुनती हूं जब तेरी बहादुरी के किस्से फक्र से सिर ऊंचा हो जाता है 
पिता की आंखों में तड़प और अभिमान दोनों नजर आता है
मुमकिन नहीं लौट आना सिर्फ अश्रुधार से समझोता होता है 
दिन रात याद आओगे जब तक मुझे कफन नही मिल जाता है 
शैलेंद्र शुक्ला"हलदौना"
 

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